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Hindi Khani Motivation | कुछ सीखने की चाहत In Hindi Story:- यह कहानी है एक मूर्तिकार की जोकि बहुत अच्छी मूर्तियां बनाया करता था और अच्छे पैसे कमाता था फिर उसके घर एक लड़का जन्म लेता है और उसका लड़का जब थोड़ा बड़ा हो जाता है तो वह अपने बेटे को भी यह मूर्ति बनाना सिखाना शुरू कर देता है और फिर उस मूर्तिकार का लड़का कुछ ही महीनों में मूर्तियां बनाना सीख गया और अच्छी मूर्तियां बनाने लगा लेकिन उसके पिता उसकी मूर्ति देखकर उसकी तारीफ करते हो और फिर कोई ना कोई कमी निकाल देते इसी तरह लड़का अपनी मूर्ति में और सुधार करता और फिर से अपने पापा को दिखाता और उसके पिता उस मूर्ति में फिर से कोई ना कोई काम ही निकाल देते

Hindi Khani Motivation | कुछ सीखने की चाहत In Hindi Story

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इसी तरह फिर वह लड़का अपनी मूर्ति में और सुधार करता और 1 दिन ऐसा आएगा कि उस लड़के की मूर्तियां उसके पिता की मूर्तियों से ज्यादा महंगी बिकने लगी और उसकी बहुत ज्यादा तारीफ होने लगी लेकिन अब भी उसका पिता उसकी मूर्ति में कोई न कोई कमी निकालता और उसे बोलता की और सुधार करो आप उसके बेटे को इस बात पर गुस्सा आता कि मेरी मूर्ति इतनी अच्छी बात नहीं है लेकिन फिर भी मेरे पिता उसमें कोई ना कोई कमी निकाल देते हैं अभी कुछ महीने बीत गए और फिर उसके पिता ने उसकी बनाई मूर्ति मैं कमी निकाली लेकिन मैं लड़का गुस्से में बोलता है कि आप से तो अच्छी सी मूर्तियां बनाता हूं फिर आप मेरी मूर्तियों में कमी क्यों निकालते रहते हैं हमेशा इससे बेहतर और नहीं बन सकती

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यह बात सुनकर लड़के का पिता चुप हो जाता है और उसे रोकना बंद कर देता है फिर कुछ ही महीने गुजरते हैं कि उस लड़के की बनाई गई मूर्तियां कम दामों में बिकने लगी और अभी उसकी कोई भी तारीफ नहीं करता था इसी वजह से उस लड़के को बहुत ज्यादा नुकसान हुआ वह लड़का अपने पिता के पास जाता है और उसके पैसे सुन रहे होते हैं कि जैसे उनको पहले ही पता हो कि ऐसा ही होगा तो वह लड़का अपने पिता से पूछता है कि आपको पहले पता था कि मेरे साथ ऐसा होगा तो उसके पिता मुस्कुरा कर कहते हैं कि हां मुझे पता था क्योंकि मैंने भी ऐसा ही किया था तो लड़का बोलता है कि आपने मुझे पहले क्यों नहीं बताया तो उसके पिता बोलते हैं कि तब तुम समझना नहीं चाहते थे तो लड़का बोलता है कि अब मुझे क्या करना चाहिए

उस लड़के के पिता उसे एक लाइन में जवाब देते हैं कि अगर तुम्हें कुछ बड़ा करना है तो तुम्हें कभी भी संतुष्ट नहीं रहना तुम जब कोई भी मूर्ति बनाओ तो अगली बार उससे बेहतर बनाने की ही सोचो ऐसा मत सोचो कि जैसी मूर्ति मैंने अब बनाई है इस मूर्ति में कोई कमी नहीं है जब तुम ऐसा सोचने लग जाओगे तो तुम्हारा विकास रुक जाएगा इसीलिए सभी लोग तुम्हारी मूर्ति में कुछ अलग देखना चाहते हैं और अगर तुम अपनी कला में संतुष्ट हो गए तो तुम्हारी कला का विकास वहीं पर रुक जाएगा इसीलिए कभी भी अपने काम में संतुष्ट नहीं रहना चाहिए और उसमें सुधार करते रहना चाहिए

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