हिंदी मोरल कहानी | Gautam Buddh Motivation Story In Hindi

Gautam Buddh Motivation Story In Hindi एक बार की बात है एक लड़का बहुत परेशान होता है वह गौतम बुद्ध जी के पास जाता है और बोलता है कि मुझे बहुत सारे धन की आवश्यकता है और गौतम बुद्ध जी से बहुत सारा धन मांगता है तो गौतम बुध जी उसे जवाब देते हैं कि एक नदी के किनारे बहुत सारे पत्थर पड़े हैं उन पत्रों में से एक पत्थर ऐसा है जो कि कि तुम किसी भी धातु के साथ उसे टच करोगे तो वह धातु सोना बन जाएगी अभी उन सभी पत्थरों में से तुम्हें वह पत्थर ढूंढना है उस पत्थर की एक खास बात है जब तुम उसे चूहों के तो वह पत्थर तुम्हें बाकी सभी पत्थरों से गरम महसूस होगा

Gautam Buddh Motivation Story In Hindi


यह सुनकर लड़का बहुत कुछ होता है और वह सोचता है सोचता है कि यह तो सोचता है कि यह तो मैं कुछ ही महीनों में वह पत्थर पा लूंगा और वह इस काम में लग जाता है और पत्थर को अपने हाथ में रखता है उसे पत्थर ठंडा लगता है और मैं उसे समुद्र समुद्र में फेंक देता है क्योंकि अगर वह पत्थर समुंदर में ना फेंके वह पत्थर फिर से दूसरे पत्थर में चला जाएगा इसी तरह का है एक पत्थर उठाता वह उसे ठंडा लगता और उसे फिर वह समुंदर में छोड़ देता इसी तरह करते करते उसे 7 दिन हो गए फिर एक महीना और फिर 2 महीने और फिर 4 महीने हो गए अब उस लड़के की गति इतनी तेज हो गई थी कि वह एक पत्थर को उठाता और समंदर और समंदर को उठाता और समंदर में फेंक देता फिर दूसरा उठाता उसे भी समुद्र में फेंक देता इसी तरह में बहुत तेजी से काम करने लगा अभी पांचवा महीना लग गया था और वह दिन आ गया था जब उसे वह सोना बनाने वाला पत्थर मिलना था तू तो उसके हाथ वह उसके हाथ वह पत्थर लगता है उसे महसूस होता है कि यह पत्थर गर्म है लेकिन उसकी अब आदत बन चुकी थी पत्थर को उठाना और समंदर में फेंकना और उस दिन भी उसने जल्दी-जल्दी भी उसने जल्दी-जल्दी जल्दी-जल्दी में वह पत्थर भी समुंदर में फेंक दिया जबकि उसे पता पता चल गया था कि मैंने मैंने मैंने वह पत्थर भी समुद्र में फेंक दिया है तो वह गौतम बुद्ध जी जी के पास जाता है

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गौतम बुध जी मुस्कुराते हुए कहते हैं कि बेटा हमारी जिंदगी भी कुछ इसी तरह है यह जो पत्थर हैं वह हमारी जो पत्थर हैं वह हमारी वह हमारी जिंदगी के एक-एक दिन हैं तुमने उन पत्थरों को विकार समझ कर कर समझ कर कर समझ कर कर फेंकना शुरू किया था और तुमने वह खास पत्थर भी वैसे ही फेंक दिया जैसे तुमने ही फेंक दिया जैसे तुमने वह बेकार पत्थर फेंके थे इससे यह सीख मिलती है कि हम लोग अपनी जिंदगी में सभी दिन को बेकार समझते हैं और ऐसे करते करते हमारी आदत बन जाती है और जब हमें मौका मिलता है कुछ करने का तो वह दिन भी हमें वैसा ही लगता है इसीलिए हम वह दिन भी मिस कर देते हैं और बाद में पछताते हैं इसीलिए अपने हर दिन को खास समझना चाहिए और जो काम आगे छोड़ा है उसे आज के आज भी करना चाहिए

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